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गायत्री चक्रवर्ती स्‍पीवाक: वैकल्‍पि‍क नजरि‍ए की तलाश

गायत्री चक्रवर्ती स्पीवाक का सबआल्टर्न स्टैडीज के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। स्त्री और हाशिए के लोगों के सवाल उन्हें उद्वेलित करते रहे हैं।गायत्री चक्रवर्ती के परिप्रेक्ष्य पर भारतीय शक्ति परंपरा के चिन्तन का गहरा असर है। वैचारिक निर्भीकता और विद्वतापूर्ण दार्शनिक अभिव्यक्ति के कारण आज वे सारी दुनिया के दार्शनिकों में स्त्री दार्शनिक के रूप में सबसे ज्यादा जान जाती हैं।स्पीवाक के यहां कार्ल मार्क्‍स की श्रम मूल्य की सैध्दान्तिकी का केन्द्रीय महत्व है।उसने मूल्य के सवाल पर सबसे ज्यादा सवाल उठाए हैं। किन्तु ये सारे सवाल विच्छिन्न रूप में उठाए हैं।श्रम मूल्य के बारे में विचार करते हुए उसने विखण्डन की पध्दति का सहारा लिया है।इस क्रम में माक्र्स की सैध्दान्तिकी की जटिलताओं को नए तरीके से खोला है।ये तथ्य स्टीफन मार्टिन की कृति'गायत्री चक्रवर्ती स्पीवाक'(2003)में विस्तार से विश्लेषित किए गए हैं।यह पुस्तक पूरी तरह स्पीवाक के कार्यों पर रोशनी डालती है।इस क्रम में यह भी तथ्य सामने रखा गया कि स्पीवाक ने कार्ल मार्क्‍स के अलावा जिन स्रोतों का अपनी व्याख्या के लिए इस्तेमाल किया उसमें…