Sunday, May 29, 2011

क्या कहती है सलमान की बॉडी लैंग्वेज

 आजकल सलमान अपनी फिल्म रेडीʼ के प्रमोशन में लगे हुए हैं। इसी क्रम में 26 मई को सलमान स्टार न्यूज के स्टुडियो में आए और स्टार न्यूज के स्टार एंकर-पत्रकार दीपक चौरसिया ने उनका ʻस्टुडियो-साक्षात्कारʼ लिया। इसका 27,28 और 29 मई को रिपीट प्रसारण भी हुआ। इस साक्षात्कार को लेकर ही मेरी ये टिप्पणी है। पहले मैं साक्षात्कार की अंतर्वस्तु पर बात करूं ताकि जिन्होंने न देखा हो वो भी समझ सकें। अमूमन सलमान खान की मीडिया छवि एक गुस्सैल, सस्ती हरकतें करनेवाला, लड़कियों का दिल तोड़ने और उन पर अत्याचार करनेवाला आदि की बनाई जाती है। पर सलमान सीधी बातचीत में लड़कियों से बात करते हुए काफी सावधान, असहज और शर्मीले नज़र आए। यहां तक कि स्टार की कर्मचारी शगुन ने सलमान के 8 पैक ऐब्स देखने चाहे और सलमान ने बड़ी सादगी से कहा कि अभी नहीं फिल्म में देख लें। कैटरीना को लेकर सवाल का जिस तरह से सस्पेंस दीपक चौरसिया बनाना चाहते थे सलमान ने एक मिनट में धो दिया। उन्होंने कहा कि पूछिए आपको जो भी पूछना है। जब आप बात आगे बढ़ा ही चुके हैं तो पूछ ही डालिए ताकि हम ऑर्डर में आगे बढ़ सकें। राखी सावंत सलमान से शादी करना चाहती हैं, सलमान का क्या क्या जवाब है? इस पर सवालकर्ता विनोद कांबली से ʻकहा तू कर लेʼ । बीना मल्लिक सलमान के साथ डेट पर जाना चाहती हैं विषय पर कांबली की टिप्पणी पर कि तुम कितने लकी हो ! सलमान ने जवाब दिया कि तू मेरा सारा लक ले ले और उसे डेट पर ले जा। सलमान एक प्रोफेशनल की तरह जवाब दे रहे थे और अपने काम के प्रति गंभीर दिख रहे थे। और सबसे बड़ी बात कि सरलता से बिना किसी हैंगओवर के जवाब दे रहे थे। वे इस साक्षात्कार में दबंग के गाने पर नाचे भी।

सलमान इस साक्षात्कार के दौरान अपनी मां को कई बार आदर से याद करते दिखे। कहा, मेरी दो माएं हैं-एक सुशीला जी और एक हेलेनजी।

सलमान अपनी शर्ट क्यों उतारते हैं। इस प्रश्न पर सलमान का जवाब था-ताकि लोग मुझे देख कर सीखें ,फिट रहें, जिमों में जाएं, जब अपने आपको आईने में नहीं देख सकते तो लोग क्या देखेंगे। इस देश में युवाओं में ड्रग्स की समस्या है, विशेषकर 6.30 से 8 बजे तक के समय को नशे के जरिए सामाजीकरण में बिताने के बजाए यदि लोग जिम में जाएं तो स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा और सोशलाइजेशन भी होगा। शरीर देखकर लोग प्रभावित होते हैं। फिल्मों और मॉडलिंग के कैरियर के लिए शरीर जरूरी है। यह लव एट फर्स्ट साइट है। अपने को, अपने शरीर को प्यार करना अच्छी बात है। अपनी फिल्मों के दृश्य को सलमान निर्विकार भाव से देख रहे थे। कभी थोड़ी मुस्कान और कभी ʻकैरेक्टर ढ़ीलाʼ पर लिप मूवमेंट करते हुए। सलमान के प्यार के बारे में जानने की बड़ी कोशिश दीपक चौरसिया ने की, पर सलमान ने अपने निजी जीवन को अलग रखा। सलमान के अंदर अपनी उम्र को लेकर कोई दुविधा या असहजता नहीं दिखी। अपनी हीरोइनों और अपने बीच उम्र के अंतर को सहजता से बताया। कहा कि सबसे एंबैरेसिंग कमेंट मेरे लिए यह होता है कि जब मेरी हीरोइन कहती है कि जब वह 3 साल की थी तो आपकी फिल्म देखी।

सलमान आम आदमी के कपडे पहने कर ही स्टुडियो में आए और यह भी कहा कि हीरो आजकल महंगे कपड़ों में आते हैं। युवा उनका अनुकरण करते हैं। मां-बाप की कमाई इतनी नहीं होती कि बच्चे के इस तरह के शौक़ पूरे करें। मैं निजी जीवन में भी सामान्य कपड़े पहनता हूं। महंगे कपड़ों पर खर्च करना पैसे बर्बाद करना है। वास्तव में सलमान ऐसा करते हैं या नहीं पर मीडिया में ऐसा कहना निश्चित ही उपभोक्तावाद के पक्ष में नहीं है।

सलमान ने कहाकि मीडिया ने ही मेरी ईमेज गंभीर और गुस्सैल की बनाई है। इस साक्षात्कार के दौरान सलमान की बॉडी लैंग्वेज एक एक्टर की नहीं, व्यक्ति सलमान की थी। जिसकी अपनी पसंद-नापसंद है और जो हर तरह की स्थितियों में केवल आनंददायी मुद्राएं नहीं बना सकता। स्टार न्यूज के एंकर दीपक चौरसिया के प्रश्नों पर सलमान न तो इंवॉल्व हो पा रहे थे न ही इंज्वॉय कर पा रहे थे। दीपक को भी ये स्थति समझ में आ गई उन्होंने कहा कि मैं इतनी देर से आपको हंसाने की कोशिश कर रहा हूं आप हंस ही नहीं रहे। सलमान का जवाब था, मैं दोस्तों के साथ हंसी-मजाक कर लेता हूं।

सलमान ने व्यंग्य पर भी व्यंग्य किया। इरफान के कार्टून पर व्यंग्य किया जिसमें सलमान के पीछे हाथ में गुलाब का फूल लेकर भागती लड़कियों के लिए सलमान का सेक्रेटरी कहता है कि ʻइन्हें पता है कि सलमान रेडी हैं।ʼ इस कार्टून को देखकर सलमान की टिप्पणी थी कि अभी तक तो मैंने नोटिस नहीं किया कि लड़कियां मुझे गुलाब देती हैं। सलमान ने कहा कि मैं जिंदगी को कार्टून नहीं समझता।

दीपक की मुश्किल ये थी कि वे सलमान की बॉडी लैंग्वेज और जवाबों से भी कुछ समझ नहीं पाए। अपने सवालों की वही घिसी-पिटी लिस्ट दोहराते रहे। सलमान स्टार न्यूज के ऑफिस में हीरो सलमान के भाव में नहीं दिख रहे थे पर एंकर की पूरी कोशिश थी कि पोस्टर फटे और हीरो निकले ताकि उसका स्टुडियो नायक की चरणधूलि से पवित्र हो। चैनल एक घंटे अपने दर्शकों का मनोरंजन कर सके। यहीं पर साक्षात्कार लेनेवाले और देनेवाले का ʻवेब लेंथʼ नहीं मिल पा रहा था और दीपक चौरसिया के सारे बाउंसर पर क्रिकेट के अनाड़ी सलमान छक्के लगा रहे थे।

चैनल बताना चाहता था अपने दर्शकों को कि वो अभी इस क्षण जो कुछ कर रहा है वो ऐतिहासिक है और अनूठा है, एक्सक्लुसिव है। वह अपने स्टुडियो में आए सलमान के हीरोइज़्म को बनाए रखना चाहता था। दीपक चौरसिया से लेकर स्टार न्यूज की अन्य महिला कर्मचारी कोशिश कर रहे थे कि सलमान वो सब करें और वो प्रभाव छोड़ें जो वो पर्दे पर करते और छोड़ते हैं। वो सलमान को भविष्यवक्ता, मीडिया इमेज में निर्मित हीरो की ऐसी छवि कि वो चाहे तो सब कुछ हो सकता है, बनाना चाहते थे पर शादी के सवाल पर सलमान ने इस भाव को समझा और थोड़ी विरक्ति से जवाब दिया कि आप मुझसे ऐसे सवाल पूछ रहे हैं जैसेकि मैं भगवान हूं। ऊपरवाले की मर्जी के बिना कुछ नहीं होता। शादी जब तक नहीं होती तब तक आप नहीं जानते कब होगी, शादी हो गई तो कब तक चलेगी ये भी पता नहीं होता।

सर-सर कह कर बातें करते हुए सलमान ने बताया कि पेंटिंग का शौक मां से मिला। मां अच्छी पेंटर हैं। उन्होंने स्टुडियो में एक पूरे बुजुर्ग चेहरे की पेंटिंग बनाई । पूछने पर तस्वीर के मायने भी बताए। एक पूरा चेहरा, यदि उसमें से सर निकाल दें तो ,हर धर्म में माथे के बिना किसी भी बुजुर्ग का चेहरा एक ही है। धर्म केवल दिमाग़ में होता है।

दोस्ती के बारे में सलमान की राय है कि दोस्ती लाईफ है। सलमान के दो पसंदीदा संवाद हैं- ʻदोस्ती की है निभानी तो पड़ेगी।ʼ और ʻइतना करोकि कभी कम न पड़े पर साला कम पड़ ही जाता है !ʼ इस पूंजीवादी समाज में दोस्ती पर जोर देना महत्वपूर्ण है। यह पूंजीवादी ʻएलियनेशनʼ की काट है पर दोस्ती के मायने दोस्ती का नाटक नहीं। समझना चाहिए कि दोस्ती का भाव कोई सामाजिक मुखौटा नहीं जिसे लगाकर प्रदर्शित किया जाए। यह एक आंतरिक भाव है। दोस्ती का प्रदर्शन और दोस्ती में फर्क़ होता है। शाहरूख से संबंध के सवाल पर साफ कहा कि मेरा झगड़ा नहीं, बनती नहीं मेरी उससे , सोच अलग-अलग है। आवन-जावन में घर को 4-5 बार पास करते हैं टी वी पर माफी मांगने से क्या।

सलमान को देखते हुए कई सवाल बार-बार मेरे मन में आए। सलमान की जगह दो और बड़े नामी खान होते तो इंटरव्यू कैसा होता। शाहरुख़ आंखों से और अपनी भंगिमाओं से बोलते हैं। माहौल को हल्का-फुल्का रखते हैं और पर्दे के शाहरुख़ यानि हीरो शाहरूख़ तथा व्यक्ति शाहरूख़ में फ़र्क नज़र नहीं आता। वही चार्म , वही आकर्षण बना रहता है। पोशाक और अदाएं भी शाहरूख़ की अपनी हैं जो पर्दे पर और बाहर भी बनी रहती हैं। आमीर की स्थिति यह है कि वो एक मीनिंगफुल हीरो और अर्थवान फिल्मों के एक्टर हैं। कम फिल्में करते हैं पर एक संदेश होगा उनकी फिल्म में , एक मायने होगा उनके द्वारा प्रमोटेड किसी भी फिल्म या वस्तु में , यह धारणा उन्होंने स्थिर कर दी है। आमीर -मतलब कुछ मायनेखेज। कह सकते हैं कि आमीर वस्तु के साथ मूल्यबोध जोड़ने में सक्षम हुए हैं। यहां तक कि अपना एक खास दर्शकवर्ग भी आमीर ने तैयार किया है। टी वी पर जब आमीर आते हैं या अपनी फिल्मों का प्रमोशन करते हैं तो उनका अंदाज अलग होता है, पर उनकी बॉडी लैंग्वेज से यह बात साफ जाहिर होती रहती है कि उन्हें पता है उनके काम का महत्व। उन्होंने कुछ कंट्रीब्यूट किया है समाज को।

सलमान की बातचीत, हरकतें और जवाब में एक विनम्रता थी। सर- सर कह कर बहुत विनम्र भाव से वो बातों का जवाब दे रहे थे पर एक आम आदमी की तरह अपनी धारणाओं पर दृढ़ता से क़ायम भी थे। जैसे भारत का आम आदमी है, सुनता वो सब नेताओं की है पर वोट किसको देगा ये राजनीति के तीसमार खांओं को भी नहीं पता होता। उन्माद के खेल का पर्याय बन चुके क्रिकेट को लेकर पूछे गए सवालों पर सीधे जवाब दिया कि क्रिकेट पसंद नहीं है , देखता नहीं हूं। इसी तरह से दीपक चौरसिया के कई आत्मकेंद्रित सवालों पर जैसे कि ʻमेरी शर्ट नहीं उतारिएगाʼ, कैटरिना और अन्य प्रेम संबंधों को लेकर पूछे गए सवालों पर सलमान ने कई बार उपेक्षा दिखाई।

इस ʻस्टुडियो-साक्षात्कारʼ (साक्षात्कार की एक उप-विधा कह सकते हैं) को देख कर यही लगता रहा कि टी वी मीडिया जो विकासशील देशों में सबसे ताक़तवर माध्यम है, अपने द्वारा निर्मित छद्म का ही शिकार होती जा रही है। भगवान या आइकॉन बनाने के उसके टोटके कई बार न केवल भ्रामक बल्कि झूठ दिखाई देते हैं। सलमान ने कुछ नहीं किया बस अपनी सहजता और सहज जवाबों और सच्ची देहभाषा से टी वी मीडिया के अहंकार को आईना दिखा दिया। सलमान अपनी फिल्म ʻरेडीʼ के और भी प्रमोशनल शो करेंगे, अन्य चैनलों पर इस फिल्म के प्रमोशन से जुड़े अन्य कार्यक्रमों के विज्ञापन भी आ रहे हैं पर ये ʻस्टुडियो-साक्षात्कारʼ तो मीडिया पाठ्यक्रम में शामिल करने लायक है !



5 comments:

shikha varshney said...

सलमान में और बाकी के खान एमन यही फरक है.बाकी एक्टिंग करते नजर आते हैं,और सलमान सहज व्यवहार.

संगीता पुरी said...

बढिया विश्‍लेषण !!

Chandan said...

deepak chourasia bilkool bevkoof lag raha tha.. aur saath me progam ka producer bhi

GirishMukul said...

सल्लू जी का अभिनय भले सहज़ हो पर भीड़ के लिये है

शिवम् मिश्रा said...

मिडिया वालों के पास आजकल कुछ ठोस रह ही नहीं गया है ...