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खिलाड़ी,बहू और मीडिया

                   सानिया स्टार टेनिस खिलाड़ी हैं। अपनी रैंकिंग में उतार-चढ़ाव के बावजूद सानिया मीडिया का पसंदीदा चेहरा रही हैं। सफल और स्टार खिलाड़ी के पीछे लगकर मीडिया उनकी छवि को अपने हक़ में भुनाता है। उन्हें इंसान से भगवान बनाने में सारी मेहनत लगा देता है। जितना बड़ा आख्यान बना सकता है बनाता है। सारी सकारात्मक स्टोरिज़ को बयान करने की कोशिश करता है। उनके कपड़े जूते , चड्ढी , बनियान सब महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस महागाथा के निर्माण के पीछे मीडिया जनमनोविज्ञान की बहती गंगा में तो हाथ धो ही रहा होता है साथ ही भविष्य का एजेण्डा भी सेट कर रहा होता है। वह अपने लीन पीरियड के लिए मसाला जुटा रहा होता है।  मीडिया ने सानिया की स्टोरी का आगाज़ पॉजिटिव ख़बर से किया था , टी वी सीरियलों में चल रही शादी और गुड़ियों सी सजी-धजी दुल्हनों की भीड़ में असली दुल्हन बनने चली सानिया मिर्जा की कहानी सुनाई गई। फिर अचानक शादी में विघ्न पैदा हुआ। जैसाकि सीरियली शादी में होता है। एक नया चरित्र आएशा का दाखिल होता है। बताया जाता है कि आएशा शोएब की पहली पत्नी ...

पत्रकारिता में पेशेवर रवैय्या आवश्यक है- पीटर गोल्डिंग

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     जनमाध्यम से संबंधित हमारी जानकारी में एक बड़ी चूक संप्रेषक या संचारकर्ता के बारे में किसी भी किस्म की विस्तृत जानकारी का अभाव है; निर्माता, लेखक, सर्जक, प्रबंधक, तकनीकीविद्, पत्रकार और अन्य जिनके निर्णय और विचार जनमाध्यम की प्रस्तुति को आकार देते हैं, इनके बारे में हमें न्यूनतम जानकारी होती है। सांस्थानिक बौध्दिकों और मनोरंजनकर्ताओं आदि जो संचार उद्योग की कार्यशक्ति का निर्माण करते हैं, संख्या में तेजी से वृध्दि हुई है, लेकिन अभी भी सही आंकड़ों का आकलन कर पाना एक मुश्किल काम है।        जनगणना के आंकड़े अपर्याप्त लेकिन बुनियादी दिशानिर्देशक आंकड़े हैं। ये बताते हैं कि ' लेखकों, पत्रकारों , और अन्य कामों से जुड़े मजदूरों ' की संयुक्त संख्या में 1951 में 19,086 से 1966 में 31,950 वृध्दि हुई है। इनमें निश्चित तौर पर ज्यादा संख्या विभिन्न किस्म के पत्रकारों की थी जिनका कुल आंकड़ा 24,000 था। इनमें से केवल 3,500 राष्ट्रीय अखबारों में काम करते थे। इनमें से लेखकों की स्थिति ज्यादा सन्दिग्ध थी। अधिकांश लेखकों के पास सांस्थानिक आधार था, ये किसी न किसी प...