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सलाम ममता

  लाखों की संख्या में आम जनता और और आगे आगे चलती ममता बनर्जी। बंगाल की असल नायिका। जी नहीं ये कोई फिल्मी दृश्य नहीं है।  जैसा कि आपने इधर की कई फिल्मों में देखा है। ये असल दृश्य है। ये ममता के बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथग्रहण के बाद बंगाल के प्रसिद्ध राइटर्स बिल्डिंग तक पैदल चल कर जाने का दृश्य है। ये जनज्वार जनता की इच्छाओं और दबी हुई आत्मशक्ति का परिचायक है। ममता बनर्जी ने राजभवन से महाकरण तक की यात्रा पैदल तय कर इसी भाव को अभिव्यक्ति दी है। साथ ही ममता क्या घोषणाएं करेंगी मुख्यमंत्री होने के बाद ऐसी किसी ख़बर के आने के पहले ये ख़बर आई है कि ममता मुख्यमंत्री होने के बाद सबसे पहले एक बलात्कृत स्त्री से मिलेंगी। आप इसे लोकप्रिय स्टंट कह सकते हैं पर ये जन भावों की अभिव्यक्ति है। एक महिला मुख्यमंत्री का सबसे पहले एक पीड़ित महिला से मिलने का कार्यक्रम स्त्री संवेदना और सह-अनुभूति का सुंदर नमूना है। ये उम्मीद हम ममता से ही कर सकते थे। ममता की उपलब्धियां जन संघर्ष के साथ-साथ स्त्री संघर्ष का भी प्रेरणादायी उदाहरण है। ममता को किसी की विरासत नहीं मिली। किसी ...

अम्मा का मंगलसूत्र

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                                                                 अन्नाद्रमुक पार्टी की नेत्री और तमिलनाडु में चौथी बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनी जयललिता ने शपथग्रहण के तुरंत बाद ही अपने कई चुनावी वादे पूरे किए। जयललिता ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि वे चुनाव जीतीं तो शादी करनेवाली लड़कियों को चार ग्राम का मंगलसूत्र देंगी। अब जयललिता चुनाव जीत चुकी हैं और उन्होंने अपना यह वायदा भी पूरा कर दिया है। शादी करनेवाली लड़कियों को चार ग्राम सोने का मंगलसूत्र सरकार की ओर से दिया जाएगा। वायदे उन्होंने और भी किए थे पर पहले पूरा होनेवाले वायदों में से एक वायदा यह भी है। इससे समझा जा सकता है कि मुख्यमंत्री अपने इस वायदे को लेकर गंभीर थीं। जिन सात वायदों को तुरंत पूरा किय...

खिलाड़ी,बहू और मीडिया

                   सानिया स्टार टेनिस खिलाड़ी हैं। अपनी रैंकिंग में उतार-चढ़ाव के बावजूद सानिया मीडिया का पसंदीदा चेहरा रही हैं। सफल और स्टार खिलाड़ी के पीछे लगकर मीडिया उनकी छवि को अपने हक़ में भुनाता है। उन्हें इंसान से भगवान बनाने में सारी मेहनत लगा देता है। जितना बड़ा आख्यान बना सकता है बनाता है। सारी सकारात्मक स्टोरिज़ को बयान करने की कोशिश करता है। उनके कपड़े जूते , चड्ढी , बनियान सब महत्वपूर्ण हो जाते हैं। इस महागाथा के निर्माण के पीछे मीडिया जनमनोविज्ञान की बहती गंगा में तो हाथ धो ही रहा होता है साथ ही भविष्य का एजेण्डा भी सेट कर रहा होता है। वह अपने लीन पीरियड के लिए मसाला जुटा रहा होता है।  मीडिया ने सानिया की स्टोरी का आगाज़ पॉजिटिव ख़बर से किया था , टी वी सीरियलों में चल रही शादी और गुड़ियों सी सजी-धजी दुल्हनों की भीड़ में असली दुल्हन बनने चली सानिया मिर्जा की कहानी सुनाई गई। फिर अचानक शादी में विघ्न पैदा हुआ। जैसाकि सीरियली शादी में होता है। एक नया चरित्र आएशा का दाखिल होता है। बताया जाता है कि आएशा शोएब की पहली पत्नी ...

यक्षिणी प्रश्न

        आज स्त्री विम र्श सबसे ज्वलंत मुद्दा है। यह एक तरह से समाज में अब तक परिभा षि त स्त्री की भूमिका को बदलने वाला विमर्श   भी है।दी गई परिस्थितियों से नकार है। अब तक होता यह आया था कि स्त्री को ' नकार ' ' के रूप में चित्रित किया जाता रहा लेकिन नकार के नियम के जनकों को यह आभास भी नहीं रहा होगा कि एक दिन स्त्री इसी को लड़ाई का औजार बना लेगी। इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि स्त्री की लड़ाई एक नकारात्मक लड़ाई है।वास्तवमें यह बहुप्रतिक्षित , बहुलंबित और दीर्धकालिक लड़ाई है जो अतिरिक्त धैर्य की मांग करता है। अतिरिक्त सावधानी और चौकन्नेपन की मांग करता है।खु शी की बात है कि स्त्रियों को इसके लिए विशेष   प्रयास नहीं करना पड़ता। सदियों के अभ्यास से अर्जित गुण उनके आज के संघर्ष   को सघनता प्रदान कर रहा है।घर बाहर की यह जागरुकता उनकी सोच और चिन्तन में आए बदलाव का संकेत है। दिलचस्प बात यह है कि औरत के औरतपन की धारणा के सबसे बड़े बंदी पुरू ष ही हैं , स्त्री नहीं।उन्हीं को औरतपने के खात्मे की चिन्ता ज्यादा है। औरतपना यानी लिंगभेद , औरतपना यानी संस्...