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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- फिलीस्तीन जनता का महान् कवि महमूद दरवेश - विजया सिंह

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फिलिस्तीन के रा ष्ट्री य कवि महमूद दरवे श मातृभूमि के प्रेम और उस पर इ स्रा इली कब्ज़े के दर्द से सराबोर हैं। उनकी कविता दे श निकाला झेलते व्यक्ति की टूटन , पीड़ा को तो व्यक्त करती ही है किन्तु उसके वापस लौटने की जीजिवि षा को भी रेखांकित करना नहीं भूलती। महमूद दरवे श की कविता में मातृभूमि के कण-कण के प्रति सकर्मक प्रेम की   अभि व्यक्ति  हुई है। उनकी कविता का एक उदाहरण देखें- मैं वहाँ से आया हूँ मैं वहाँ से आया हूँ और मेरे पास स्मृतियाँ हैं , मैं औरों की तरह न श्व र हूँ और मेरे पास माँ है , और है एक घर अनेक खिड़कियोंवाला , मेरे पास भाई , बंधु हैं और एक कारागार भी है , जिसकी खिड़कियाँ सर्द हैं। वह लहर भी मेरी है जिसे अभी-अभी समुद्री चिड़िया ने निगल लिया है , मेरे पास मेरे विचार हैं , और एक अतिरिक्त घास की पत्ती भी। श ब्दों के दूर तक फैले किनारे पर बैठा , वह चंद्रमा भी मेरा है , और चिड़ियों की अनकही उदारता , और जैतून वृक्ष की अकल्पनीय अन श्व रता भी। जिस भूमि , पर मैंने तलवारों के साए में गति पाई है उसका जीवंत श रीर अब नि ष्क्रि य बोझा भर है। मैं वहाँ स...

फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- फिलीस्तीन के बिना अधूरा है प्राच्यवाद

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                                                                           आलोचकगण जब ' ओरिएण्टलिज्म ' पर विचार करते हैं तो यह भूल जाते हैं कि आखिरकार सईद को यह किताब लिखने की जरूरत क्यों पड़ी ?      यह किताब जब लिखी गयी थी तब सारी दुनिया में नए सिरे से नव्य-औपनिवेशिकता और नव्य-आर्थिक उदारतावाद की मुहिम शुरू हो चुकी थी। इस मुहिम का लक्ष्य नए किस्म की वैचारिक गुलामी था। द्वितीय विश्वयुध्दोत्तार दौर में मध्य-पूर्व से इसका सिलसिला आरंभ हुआ था और आज वह अपनी पकड़ में सारी दुनिया को ले चुका है। यही वह प्रस्थान-बिंदु है जिसके कारण ' ओरिण्टलिज्म ' का संदर्भ-सूत्र मध्यपूर्व और साम्राज्यवाद विरोध है। ' ओरिण्टलिज्म ' लिखने का मकसद विचार-विमर्श करना मात्र...

फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- युद्धपंथी हैं अमेरिका और इस्राइल - जगदीश्वर चतुर्वेदी

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   अमरीकी साम्राज्यवाद के लिए शांति बेकार की चीज है। शांति बोगस है। खोखली है। शांति का जाप करना बेकार है। शांति वार्ताएं व्यर्थ हैं। कब्जा सच्चा शांति झूठी। इ स्राइ ल-अमरीकी विदेशनीति सारी दुनिया को एक ही संदेश संप्रेषित कर रही है शांति बेकार है। अमरीकी विदेशनीति की सैन्य बर्बरता की जितनी बड़ी सच्चाई मध्यपूर्व में सामने आयी है वह अन्यत्र पहले देखने को नहीं मिल ती ।      इ स्राइ ल लगातार अपने विस्तारवादी इरादों के साथ फिलीस्तीन पर हमले करता रहा है , उनकी जमीन पर कब्जा   कि ए हुए है। यही नीति है जिस े अमरीका ने इराक में लागू किया। इज स्राइ ल ने फिलीस्तीन पर हमले करते हुए किसी की नहीं मानी अमरीका ने भी इराक पर हमला करते समय किसी की नहीं मानी। इ स्राइ ल को फिलीस्तीन का राजनीतिक समाधान स्वीकार नहीं है अमरीका को भी इराक का राजनीतिक समाधान स्वीकार नहीं है। इ स्राइ ल के लिए समस्त समझौते और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के प्रस्ताव बेमानी हैं यही स्थिति अमरीका की भी है। इ स्राइ ली अधिकारी शांति के नाम पर कभी कभार मिलते हैं , हाथ मिलाते हैं , बयान देते हैं किंत...

फिलीस्तीन की आशा और प्रेरणा हैं एडवर्ड सईद - हितेन्द्र पटेल

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                                                                                                                                            प्रख्यात विद्वान एडवर्ड सईद (1935-2003) अब नहीं हैं । इनकी मृत्यु के बाद सारी दुनिया के बौद्धिक जगत में एक खालीपन का अहसास बहुतों को हुआ होगा। आज के उत्तर-आधुनिक दौर में ...