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Showing posts with the label फिलिस्तीन मुक्ति सप्ताह

युद्ध पत्रकारिता के विकल्प की तलाश में - जगदीश्वर चतुर्वेदी

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                                                        ( गाजा में इस्राइल के अवैध कब्जे के खिलाफ फिलीस्तीनी कलाकारों की प्रतिवादी कला) ---------------------------------------------------------------------------------------------- संकट की अवस्था में मीडिया को कैसे देखें ? यह सवाल सबसे महत्व का है। संकट की अवस्था में साधारण लोग संशय और भ्रम के शिकार होते हैं।ऐसी स्थिति में साधारण आदमी का मीडिया पर विश्वास नहीं होता और न स्वयं पर ही भरोसा होता है। क्षेत्रीय युध्द का कवरेज इसे क्षेत्रीय युध्द नहीं रहने देता , बल्कि विश्वव्यापी मुद्दा बना देता है।इस तरह के युध्द के कवरेज में लगातार विध्वंस और मौत के दृश्य बार बार आते रहे हैं , ये दृश्य हमें बार-बार ज्यादा से ज्यादा व्याख्या की ओर ले जाते हैं किंतु टीवी पर व्याख्...

अमरीकी सैन्य उद्योग का मध्यपूर्व में सूचना वर्चस्व- जगदीश्वर चतुर्वेदी

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                                                                                          अमेरिकी साम्राज्यवाद का उत्तर आधुनिक मंत्र है सूचना वर्चस्व बनाए रखो। विरोधी के सूचना तंत्र को नष्ट करो , अप्रासंगिक बनाओ। इस मंत्र का मध्यपूर्व में भी इस्तेमाल किया जा रहा है।जो मीडिया साथ नहीं है , उसके साथ शत्रुतापूर्ण बर्ताव करना , दण्डित करना , उसे भी आतंकवाद विरोधी मुहिम के निशाने पर लाना। इसी तथ्य को ध्यान में रखकर मीडिया को चौथा मोर्चा घोषित कर दिया गया है। मीडिया के खिलाफ भी युध्द की घोषणा कर दी गयी है। नयी परिस्थितियों में संवाददाता , चैनल , अखबार आदि सभी को निशाना बनाया जा रहा है। मीडिया को वस्तुत : युध्द का उपकरण घोषित कर दिया गया है। यह विश्वस्तर पर चल रही अमेरिका की ' आतंकविरोधी मुहिम ' का वैध निशाना है।सेना का वैध लक्ष्य है।  ...

फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह का आज आखिरी दिन- मध्यपूर्व के बारे में मीडिया में इस्राइली मिथ- जगदीश्वर चतुर्वेदी

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(इस्राइल हमले के प्रतिवाद में बनायी फिलीस्तीनी चित्रकार की पेंटिंग)                                                           इस्राइली सेना के बारे में पश्चिमी मीडिया यह मिथ प्रचारित कर रहा है कि वह कभी गलती नहीं कर सकता। इस्राइली हमेशा जीतेंगे। इस्राइली सेना इस्राइली जनता की रक्षा करेगी। इस्राइली चैनलों में ' हम ' की केटेगरी के तहत पश्चिम की प्रशंसा और पश्चिम के साथ इस्राइली रिश्ते के साथ जोड़कर पेश किया जा रहा है। इस्राइल के द्वारा ' अन्य ' या पराए की केटेगरी में समूचे अरब जगत को पेश किया जा रहा है। फिलीस्तीनी और अरब जनता को ' न्यूसेंस ' और आतंकी के रूप में पेश किया जा रहा है। इस्राइली प्रचार में कहा जा रहा है इस्राइल का लक्ष्य है ' न्यूसेंस ' और आतंकवाद का विरोध करना , उसका सफाया करना।ऐसा करने में किसी भी किस्म के पश्चाताप करने की जरूरत नहीं है। अरब जनता को शक्लविहीन और आतंकी बनाने में पश्चिमी मीडिया का बड़ा हाथ है , खासकर ...

फिलीस्तीनी कलाकारों का सर्जनात्मक प्रतिवाद

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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- वैस्ट बैंक और गाजापट्टी में इस्राइली बर्बरता

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      इस्राइल ने गाजापट्टी और वेस्टबैंक के बीच स्वघोषित सीमा निर्धारण और अवैध कब्जा कर रखा है। यह अंतर्राष्ट्रीय सीमारेखा नहीं है पर इसे पार करने के लिए बाकायदा पासपोर्ट और वीजा की जाँच इस्राइली ऑफिसरों द्वारा की जाती है। अक्टूबर 2007 के पहले तक यानि हम्मास के सत्ता में आने के पहले तक भी यही स्थिति थी। अन्य देश के लोगों का गाजापट्टी में घुसना लगभग दुष्कर काम था। आज भी यह उतना ही कठिन बना हुआ है। लोगों के आने-जाने के साथ -साथ सूचनाओं पर भी कठोर नियंत्रण रखा जाता है। सबसे पहले तो इस्राइली वर्किंग वीजा मिलना ही मुश्किल होता है। गाजा की तरफ से इस्राइल में घुसना आसान नहीं है। इरेज़ की तरफ से घुसा जा सकता है पर वहाँ इस्राइल की दादागिरी की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस्राइली सेना की अनुमति से कुछ मानवाधिकार संगठनों के लोग , कुछ राजनीतिज्ञों और कुछ पत्रकारों आदि को ही जाने देते हैं। इरेज़ से निकलने पर इस्राइली अफसरों के द्वारा 'निर्गत' की मुहर लगाई जाती है। ऐसे ही गाजा पट्टी से निकलते समय 'आगत' की मुहर लगाई जाती है। इसी तरह से गाजा में काम कर रहे अंत...

फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- फिलीस्तीनियों की अतुलनीय कुर्बानी और मानवता - जगदीश्वर चतुर्वेदी

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(गाजा में हैती की आपदाग्रस्त जनता के लिए सहायता सामग्री एकत्रित करते फिलीस्तीनी लोग )                                                    जो लोग मुक्ति के लिए संघर्ष करते हैं वे खुदगर्ज नहीं होते। फिलीस्तीनियों का स्वभाव भी कुछ ऐसा ही है उनमें अपने वतन को पाने की जितनी चाह है उससे भी ज्यादा गहरी सहानुभूति दूसरों के प्रति है। बीबीसी लंदन ने 19जनवरी 2010 को खबर दी कि गाजा में बाढ़ आ गयी है। बाढ़ से व्यापक क्षति होने का अनुमान है। जिस समय बाढ़ आयी उसी समय जबर्दस्त बारिश भी हुई। सैंकड़ों परिवार इससे प्रभावित हुए हैं।       बाढ़ और बारिस ने इतनी व्यापक तबाही मचायी कि गाजापट्टी में आपात्काल की घोषणा करनी पड़ी। समूचे इलाके में पानी भर गया। यहां तक कि पशु वगैरह भी पानी में ही फंसे हुए हैं, घरों ,खेतों और और सड़कों पर पा...