फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- फिलीस्तीन के बिना अधूरा है प्राच्यवाद
आलोचकगण जब ' ओरिएण्टलिज्म ' पर विचार करते हैं तो यह भूल जाते हैं कि आखिरकार सईद को यह किताब लिखने की जरूरत क्यों पड़ी ? यह किताब जब लिखी गयी थी तब सारी दुनिया में नए सिरे से नव्य-औपनिवेशिकता और नव्य-आर्थिक उदारतावाद की मुहिम शुरू हो चुकी थी। इस मुहिम का लक्ष्य नए किस्म की वैचारिक गुलामी था। द्वितीय विश्वयुध्दोत्तार दौर में मध्य-पूर्व से इसका सिलसिला आरंभ हुआ था और आज वह अपनी पकड़ में सारी दुनिया को ले चुका है। यही वह प्रस्थान-बिंदु है जिसके कारण ' ओरिण्टलिज्म ' का संदर्भ-सूत्र मध्यपूर्व और साम्राज्यवाद विरोध है। ' ओरिण्टलिज्म ' लिखने का मकसद विचार-विमर्श करना मात्र...