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फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- वैस्ट बैंक और गाजापट्टी में इस्राइली बर्बरता

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      इस्राइल ने गाजापट्टी और वेस्टबैंक के बीच स्वघोषित सीमा निर्धारण और अवैध कब्जा कर रखा है। यह अंतर्राष्ट्रीय सीमारेखा नहीं है पर इसे पार करने के लिए बाकायदा पासपोर्ट और वीजा की जाँच इस्राइली ऑफिसरों द्वारा की जाती है। अक्टूबर 2007 के पहले तक यानि हम्मास के सत्ता में आने के पहले तक भी यही स्थिति थी। अन्य देश के लोगों का गाजापट्टी में घुसना लगभग दुष्कर काम था। आज भी यह उतना ही कठिन बना हुआ है। लोगों के आने-जाने के साथ -साथ सूचनाओं पर भी कठोर नियंत्रण रखा जाता है। सबसे पहले तो इस्राइली वर्किंग वीजा मिलना ही मुश्किल होता है। गाजा की तरफ से इस्राइल में घुसना आसान नहीं है। इरेज़ की तरफ से घुसा जा सकता है पर वहाँ इस्राइल की दादागिरी की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस्राइली सेना की अनुमति से कुछ मानवाधिकार संगठनों के लोग , कुछ राजनीतिज्ञों और कुछ पत्रकारों आदि को ही जाने देते हैं। इरेज़ से निकलने पर इस्राइली अफसरों के द्वारा 'निर्गत' की मुहर लगाई जाती है। ऐसे ही गाजा पट्टी से निकलते समय 'आगत' की मुहर लगाई जाती है। इसी तरह से गाजा में काम कर रहे अंत...

फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- फिलीस्तीनियों की अतुलनीय कुर्बानी और मानवता - जगदीश्वर चतुर्वेदी

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(गाजा में हैती की आपदाग्रस्त जनता के लिए सहायता सामग्री एकत्रित करते फिलीस्तीनी लोग )                                                    जो लोग मुक्ति के लिए संघर्ष करते हैं वे खुदगर्ज नहीं होते। फिलीस्तीनियों का स्वभाव भी कुछ ऐसा ही है उनमें अपने वतन को पाने की जितनी चाह है उससे भी ज्यादा गहरी सहानुभूति दूसरों के प्रति है। बीबीसी लंदन ने 19जनवरी 2010 को खबर दी कि गाजा में बाढ़ आ गयी है। बाढ़ से व्यापक क्षति होने का अनुमान है। जिस समय बाढ़ आयी उसी समय जबर्दस्त बारिश भी हुई। सैंकड़ों परिवार इससे प्रभावित हुए हैं।       बाढ़ और बारिस ने इतनी व्यापक तबाही मचायी कि गाजापट्टी में आपात्काल की घोषणा करनी पड़ी। समूचे इलाके में पानी भर गया। यहां तक कि पशु वगैरह भी पानी में ही फंसे हुए हैं, घरों ,खेतों और और सड़कों पर पा...

फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- इस्राइली सैन्यवाद और फिलीस्तीन की आर्थिक तबाही - जगदीश्वर चतुर्वेदी

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                                                                                                                  एक जमाना था हिन्दी में साहित्यकारों और युवा राजनीतिक कार्यक र्त्ता ओं में युध्द विरोधी भावनाएं चरमोत्कर्ष पर हुआ करती थीं , हिन्दीभाषी क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में युध्द विरोधी गोष्ठियां , प्रदर्शन , काव्य पाठ आदि के आयोजन हुआ करते थे , किंतु अब यह सब परीकथा की तरह लगता है। हिन्दी के बुध्दिजीवियों में अंतर्राष्ट्रीय म...

फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह- फिलीस्तीन के महान गुरु इब्राहिम अबू लोग़द - एडवर्ड सईद

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                                        [ इब्राहिम अबू लोग़द (Lughod)  अमरीकी विश्वविद्यालयों में फिलीस्तीन मुक्ति के सवाल पर संघर्षशील वैचारिक आन्दोलन के असली उद्योक्ता थे। यहां एडवर्ड सईद का लिखा लेख प्रस्तुत है जिसमें उन्होंने इब्राहिम लोग़द को अपना गुरु कहा है । साथ ही उन दिनों का विवरण दिया है जिसके कारण खुद एडवर्ड सईद ' ओरियन्टलिज्म ' के लेखन की ओर बढ़ पाये। अल-अहराम  पत्रिका में छपे इस लेख का अनुवाद डा. रूपा गुप्ता ,रीडर ,हिन्दी  विभाग,वर्धमान विश्वविद्यालय ,वर्धमान,प.बंगाल ने किया है । ] लंबी बीमारी के बाद बहत्तर वर्ष की आयु में 23 मई को इब्राहिम अबू लोग़द अपने रामल्लाह स्थित घर में चल बसे। वे नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक रहे और बाद में बीर . जेट यूनिवर्सिटी , वेस्ट बैंक के उपाध्यक्ष बने। तेलअवीव एयरपोर्ट पर उनसे मिलने के लिए...

फिलीस्तीन मुक्ति सप्ताह - गाजापट्टी की नाकेबंदी और जनता की तबाही- जगदीश्वर चतुर्वेदी

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   गाजा की इस्राइल द्वारा नाकेबंदी जारी है। हजारों लोग खुले आकाश के नीचे कड़कड़ाती ठंड में ठिठुर रहे हैं , इन लोंगों के पास न तो कम्बल हैं, न टैंट हैं, न खाना है, न पीने का साफ पानी है। यह बातें संयुक्तराष्ट्र संघ मानवीय सहायता दल के संयोजक मैक्सवेल गेलार्ड ने फिलीस्तीनी इलाकों का ङाल ही में निरीक्षण करने के बाद पत्रकारों से कही हैं।      उल्लेखनीय है पिछले साल दिसम्बर-08 से जनवरी 2009 के बीच गाजा पर की गई भयानक बमबारी के कारण हजारों बिल्डिंगें ,मकान, स्कूल,अस्पताल सड़कें आदि पूरी तरह नष्ट हो गए थे। एक गैर सरकारी संस्था ऑक्सफॉम के अनुसार गाजा को तत्काल 268,000 मीटर कांच खिड़कियों के लिए और 67,000 स्क्वेयर मीटर सोलर वाटर हीटर के लिए चाहिए। इसके अलावा इतना ही कांच 30 फुटबाल पिचों को कवर करने के लिए चाहिए।      गाजा में फिछले साल हुई इस्राइली बमबारी के कारण पानी सप्लाई , पायखाना, बिजली आदि का समूचा ढ़ांचा नष्ट हो गया। सहायता कार्य में लगी संस्थाओं को बड़ी परेशानी हो रही है। उन्हें सीवर लाइन के पाइप,वाटर पंप ,टंकी आदि की मरम्मत के लिए प...