यक्षिणी प्रश्न
आज स्त्री विम र्श सबसे ज्वलंत मुद्दा है। यह एक तरह से समाज में अब तक परिभा षि त स्त्री की भूमिका को बदलने वाला विमर्श भी है।दी गई परिस्थितियों से नकार है। अब तक होता यह आया था कि स्त्री को ' नकार ' ' के रूप में चित्रित किया जाता रहा लेकिन नकार के नियम के जनकों को यह आभास भी नहीं रहा होगा कि एक दिन स्त्री इसी को लड़ाई का औजार बना लेगी। इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि स्त्री की लड़ाई एक नकारात्मक लड़ाई है।वास्तवमें यह बहुप्रतिक्षित , बहुलंबित और दीर्धकालिक लड़ाई है जो अतिरिक्त धैर्य की मांग करता है। अतिरिक्त सावधानी और चौकन्नेपन की मांग करता है।खु शी की बात है कि स्त्रियों को इसके लिए विशेष प्रयास नहीं करना पड़ता। सदियों के अभ्यास से अर्जित गुण उनके आज के संघर्ष को सघनता प्रदान कर रहा है।घर बाहर की यह जागरुकता उनकी सोच और चिन्तन में आए बदलाव का संकेत है। दिलचस्प बात यह है कि औरत के औरतपन की धारणा के सबसे बड़े बंदी पुरू ष ही हैं , स्त्री नहीं।उन्हीं को औरतपने के खात्मे की चिन्ता ज्यादा है। औरतपना यानी लिंगभेद , औरतपना यानी संस्...