भाषा में स्त्री के अनुभव
एन्द्रीने रीच ने लिखा है '' स्त्री संघर्ष का समस्त इतिहास सदियों से चुप्पी में डूबा हुआ है। किसी भी स्त्रीवादी लेखिका के लिए सबसे बड़ी सांकृतिक बाधा यह आती है कि प्रत्येक स्त्रीवादी लेखन किसी शू न्य से पैदा हुआ जान पड़ता है ; जैसे कि हममें से प्रत्येक बिना किसी ऐतिहासिक अतीत , संदर्भयुक्त वर्तमान के जीते , सोचते और काम करते हैं। यह उन कई रास्तों में से एक है जिनमें स्त्री के काम को विच्छिन्न , अनियमित और अपनी किसी भी परंपरा से यतीम मान लिया जाता है। '' ऐतिहासिक तौर पर स्त्रियाँ किसी भी तरह के सांस्कृतिक उत्पादन से बाहर रखी गईं। भा षा संस्कृति का सबसे अहम हिस्सा है। चूँकि स्त्रियाँ उत्पादन में शा मिल न होकर सिर्फ उसकी प्रयोगकर्ता हैं इसलिए वे अपने सांकेतिक अर्थ को प्रमुखता देने में असमर्थ हैं। स्त्री और पुरू ष दोनों ही अर्थ उत्पन्न करने की क्षमता रखते हैं लेकिन स्त्रियाँ इस स्थिति में नहीं रहीं कि उनके द्वारा दिए गए अर्थ को सामाजिक तौर पर मान्यता मिल सके। वे कभी सार्वजनिक...