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स्‍त्री का शरीर,कमरा और वि‍जन

स्त्रीवादी साहित्यालोचना विमर्श वर्जीनिया वुल्फ और क्लेरीस लिस्पेक्टर के बिना अधूरा है। वर्जीनिया वुल्फ और क्लेरीस लिस्पेक्टर ने स्त्रीवादी साहित्यालोचना में जिन धारणाओं को रचा और साहित्य के जिन नए मानकों की सर्जना की है वे आज स्त्री आलोचना की धुरी हैं। संसार में स्त्री सृष्टि के आरंभ से है] उसकी चर्चा भी उतनी ही पुरानी है। किन्तु कुछ ऐसा उलटा पुलटा हुआ है कि स्त्री मातहत हो गयी] अधिकारहीन हो गयी। घर की मालकिन बना दी गयी किन्तु उसके पास अपने लिए कोई स्वतंत्र रहने का कमरा या कोठरी तक नहीं थी। उसका संसार में अस्तित्व था]संसार की सारी वस्तुएं उसके लिए थीं]उसके बिना कोई भी चीज अच्छी नहीं लगती थी। किन्तु वह किसी भी वस्तु को पा नहीं सकती थी। वस्तु]संसार और संस्कृति के केन्द्र में वह थी]परन्तु इस संसार से बेदखल थी।संसार से औरत को किसने बेदखल किया, उसका आशियाना किसने उजाड़ा। वह क्यों इस संसार में आई और उसके क्या अधिकार थे, क्या संसार में उसके लिए एक गज जमीन भी छोड़ी गयी ,वगैर आशियाने और बगैर धन के वह असहाय थी। वह मानवता की सबसे बड़ी सर्जक थी और सबसे बड़ी गरीब भी थी। किन्तु हमारे साहित्यक...