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क्यों मारी जाती हैं अनामिकाएँ? -सुधा सिंह

    इस जाते हुए साल के अंतिम दो हफ़्तों में पहली बार स्त्री के मुद्दे पर राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन भारत की जनता ने किया। दिल्ली से लेकर अन्य शहरों और गांवों तक में इसकी गूंज सुनाई पड़ी। मुद्दा 16 दिसंबर की रात दिल्ली की मुनिरका बस स्टॉप से एक प्राइवेट बस में सवार होनेवाली लड़की के साथ बर्बर सामूहिक दुष्कर्म के बाद उसे और उसके दोस्त को घायल करके नग्न अवस्था में नीचे फेंक देने का है। उस लड़की जिसे हम अनामिका कहेंगे कि मौत हो गई। लेकिन इस घटना के बाद भी जबकि जनता का सैलाब पूरी दिल्ली समेत अन्य शहरों को आंदोलित किए हुए था, ऐसी और इससे मिलती-जुलती कई घटनाएं सामने आईं।  इन्हीं धरने-प्रदर्शनों में शामिल हममें से कोई इस तरह के यौन-उत्पीड़न का शिकार हो रही थी और इन्हीं में शामिल हममें से कोई यौन-उत्पीड़न में भागीदार था। क़ानून और संस्थाओं का वही मर्दवादी रवैय्या निकल कर आ रहा था। इन सबके बीच कहीं पुलिस, कहीं परिवार, कहीं समाज, कहीं जाति, कहीं धर्म और अन्य शक्ति के    संस्थाओं का वही रूप निकल कर आ रहा था जिसकी तस्दीक सदियों से हमारा पुंसवादी समाज करता आ रहा है। ...

उत्तर आधुनिक माध्यम परिदृश्य को कैसे समझें -सुधा सिंह

  यह लेख बजरिए मैतेलार्द उत्तरआधुनिक माध्यम परिदृश्य को समझने की कोशिश है। इसे सूचना समाजःएक परिचय पुस्तक की भूमिका के रूप में लिखा गया है। यहां उसका एक अंश दिया जा रहा है।      इस पुस्तक के बारे में विस्तृत जानकारी इस प्रकार है-सूचना समाजःएक परिचय, आर्मंड मैतेलार्द, अनुवाद और संपादन--सुधा सिंह, प्रकाशक ग्रंथशिल्पी, सरस्वती कॉम्प्लेक्स, सुभाष चौक, लक्ष्मीनगर, नई दिल्ली-110092, मूल्य-395 रूपए,2012     सूचना समाज पदबंध का संबंध सूचना के बुनियादी रूप से न होकर अत्याधुनिक रूप से है। इसके अंतर्गत एक ऐसे समाज की बात की गई है जो पूरी तरह से सूचनाओं के संजाल से घिरा हो। सूचनाएं उसके उपभोग के लिए अहर्निश उपलब्ध हों। मनुष्य के विचार, चिंतन और दर्शन के सारे रूप सूचनाओं में बदल दिए गए हों। मेतलार्द की ‘सूचना समाज’ की विश्लेषण प्रक्रिया से साफ जाहिर है कि वे मानव मस्तिष्क के निरंतर कुंद किए जाने की प्रक्रिया से परेशान हैं। मनुष्य के परिश्रम को आसान करने के नाम पर ईजाद की गई ये मशीनें मनुष्य को अपनी बुद्धि और मेधा के इस्तेमाल करने से विरत करती हैं।  ...

किसान क्या खाएं- सहजानन्द सरस्वती

हमने देखा है कि किसानों को दिन-रात इस बात की फिक्र रहती है कि मालिक (जमींदार) का हक नहीं दिया गया, दिया जाना चाहिए, साहू-महाजन का पावना पड़ा हुआ है उसे किसी प्रकार चुकाना होगा, चौकीदारी टैक्स बाकी ही है, उसे चुकता करना है, बनिये का बकिऔता अदा करना है आदि-आदि। उन्हें यह भी चिन्ता बनी रहती है कि तीर्थ-व्रत नहीं किया, गंगा स्नान न हो सका, कथा वार्ता न करवा सके, पितरों का श्राद्ध तर्पण पड़ा ही है, साधु-फकीरों को कुछ देना ही होगा, देवताओं और भगवान को पत्र-पुष्प यथाशक्ति समर्पण करना ही पड़ेगा। वे मन्दिर-मस्जिद बनाने और अनेक प्रकार के धर्म दिखाने में भी कुछ न कुछ देना जरूरी समझते हैं। यहाँ तक कि ओझा-सोखा और डीह-डाबर की पूजा में भी उनके पैसे खामख्वाह खर्च हो ही जाते हैं। चूहे, पंछी, पशु, चोर बदमाश और राह चलते लोग भी उनकी कमाई का कुछ न कुछ अंश खा जाते हैं। सो भी प्राय: अच्छी चीजें ही। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि बहुत ही हिफाजत से रखने पर भी बिल्ली उनका दूध-दही उड़ा जाती है। कौवों का दाँव भी लग ही जाता है। कीड़े-मकोड़े और घुन भी नहीं चूकते वे भी कुछ लेई जाते हैं।  सारांश यह कि संसार के सभी अच...

कौन सी चीज इतिहास बनाती है और किस पर शर्म करें!

 भारतीय मीडिया खासकर हिन्दी मीडिया में शर्म, अपमान, पराजय, हार, असफलता और रोष की भाषा कब बोली जाती है कभी सोचा है आपने ? केवल खेल की खबरों की रिपोर्टिंग करते समय। जनता के मुद्दे पर नहीं। सरकार की नीतियों की आलोचना करते समय नहीं। विपक्ष की भूमिका और दायित्वों की बात करते समय नहीं। या किसी बड़े सार्वजनिक नुकसान पर नहीं। वहां एक गहरी तटस्थता दिखाई जाती है। मैं आपको आज (11जुलाई2011)प्रसारित होनेवाले टी वी ख़बरों से एक उदाहरण दूं। ये ख़बरें एक ही चैनल की हैं, दो अलग चैनलों की नहीं। ताकि चैनल की नीति, समाचार चयन और भाषा की एक मामूली झलक आपको मिल सके। कल की दो बड़ी ख़बरों में से एक खेल जगत की थी और एक कालका मेल के दुर्घटनाग्रस्त होने की। स्टार न्यूज पर वेस्टइंडीज और भारत के बीच चल रहे टेस्ट मैच सीरिज पर ख़बर थी। ख़बर का सार था कि धोनी की विश्व रैंकिंग में नम्बर वन टीम ने ये सीरिज जीत ली है और कल का टेस्ट ड्रा रहा है। प्रस्तुति की भाषा थी कि धोनी की नम्बर वन टीम ने सातवें रैंक की वेस्टइंडीज की टीम से मैच ड्रा कर लिया। इसकी प्रस्तुति इस प्रकार थी कि भारत में उन लाखों दर्शकों को कितनी शर्म...

सलाम ममता

  लाखों की संख्या में आम जनता और और आगे आगे चलती ममता बनर्जी। बंगाल की असल नायिका। जी नहीं ये कोई फिल्मी दृश्य नहीं है।  जैसा कि आपने इधर की कई फिल्मों में देखा है। ये असल दृश्य है। ये ममता के बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री के रूप में शपथग्रहण के बाद बंगाल के प्रसिद्ध राइटर्स बिल्डिंग तक पैदल चल कर जाने का दृश्य है। ये जनज्वार जनता की इच्छाओं और दबी हुई आत्मशक्ति का परिचायक है। ममता बनर्जी ने राजभवन से महाकरण तक की यात्रा पैदल तय कर इसी भाव को अभिव्यक्ति दी है। साथ ही ममता क्या घोषणाएं करेंगी मुख्यमंत्री होने के बाद ऐसी किसी ख़बर के आने के पहले ये ख़बर आई है कि ममता मुख्यमंत्री होने के बाद सबसे पहले एक बलात्कृत स्त्री से मिलेंगी। आप इसे लोकप्रिय स्टंट कह सकते हैं पर ये जन भावों की अभिव्यक्ति है। एक महिला मुख्यमंत्री का सबसे पहले एक पीड़ित महिला से मिलने का कार्यक्रम स्त्री संवेदना और सह-अनुभूति का सुंदर नमूना है। ये उम्मीद हम ममता से ही कर सकते थे। ममता की उपलब्धियां जन संघर्ष के साथ-साथ स्त्री संघर्ष का भी प्रेरणादायी उदाहरण है। ममता को किसी की विरासत नहीं मिली। किसी ...

क्या कहती है सलमान की बॉडी लैंग्वेज

 आजकल सलमान अपनी फिल्म रेडीʼ के प्रमोशन में लगे हुए हैं। इसी क्रम में 26 मई को सलमान स्टार न्यूज के स्टुडियो में आए और स्टार न्यूज के स्टार एंकर-पत्रकार दीपक चौरसिया ने उनका ʻस्टुडियो-साक्षात्कारʼ लिया। इसका 27,28 और 29 मई को रिपीट प्रसारण भी हुआ। इस साक्षात्कार को लेकर ही मेरी ये टिप्पणी है। पहले मैं साक्षात्कार की अंतर्वस्तु पर बात करूं ताकि जिन्होंने न देखा हो वो भी समझ सकें। अमूमन सलमान खान की मीडिया छवि एक गुस्सैल, सस्ती हरकतें करनेवाला, लड़कियों का दिल तोड़ने और उन पर अत्याचार करनेवाला आदि की बनाई जाती है। पर सलमान सीधी बातचीत में लड़कियों से बात करते हुए काफी सावधान, असहज और शर्मीले नज़र आए। यहां तक कि स्टार की कर्मचारी शगुन ने सलमान के 8 पैक ऐब्स देखने चाहे और सलमान ने बड़ी सादगी से कहा कि अभी नहीं फिल्म में देख लें। कैटरीना को लेकर सवाल का जिस तरह से सस्पेंस दीपक चौरसिया बनाना चाहते थे सलमान ने एक मिनट में धो दिया। उन्होंने कहा कि पूछिए आपको जो भी पूछना है। जब आप बात आगे बढ़ा ही चुके हैं तो पूछ ही डालिए ताकि हम ऑर्डर में आगे बढ़ सकें। राखी सावंत सलमान से शादी करना चाहती है...

अम्मा का मंगलसूत्र

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                                                                 अन्नाद्रमुक पार्टी की नेत्री और तमिलनाडु में चौथी बार चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनी जयललिता ने शपथग्रहण के तुरंत बाद ही अपने कई चुनावी वादे पूरे किए। जयललिता ने अपने चुनावी घोषणापत्र में कहा था कि वे चुनाव जीतीं तो शादी करनेवाली लड़कियों को चार ग्राम का मंगलसूत्र देंगी। अब जयललिता चुनाव जीत चुकी हैं और उन्होंने अपना यह वायदा भी पूरा कर दिया है। शादी करनेवाली लड़कियों को चार ग्राम सोने का मंगलसूत्र सरकार की ओर से दिया जाएगा। वायदे उन्होंने और भी किए थे पर पहले पूरा होनेवाले वायदों में से एक वायदा यह भी है। इससे समझा जा सकता है कि मुख्यमंत्री अपने इस वायदे को लेकर गंभीर थीं। जिन सात वायदों को तुरंत पूरा किय...